Premanand Maharaj: क्या छोटे बच्चों के हाथ में मोबाइल देना ठीक है? प्रेमानंद महाराज ने दिया जवाब




Premanand Maharaj: आज के दौर में ज्यादातर माता-पिता काम में इतने व्यस्त रहते हैं कि बच्चों को दिनभर अपने पास नहीं रख पाते। ऑफिस के काम के बीच जब बच्चे रोने या जिद करने लगते हैं, तो कई बार उन्हें शांत कराने के लिए मोबाइल फोन हाथ में थमा दिया जाता है।

कई माता-पिता तो बच्चों को खाना खिलाने के लिए भी कार्टून या यूट्यूब वीडियो चला देते हैं।

पर सवाल ये है क्या ऐसा करना सच में सही है?

इस पर वृंदावन-मथुरा के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने बहुत ही सटीक जवाब दिया है।

मोबाइल बच्चों के हाथ में देना सही या गलत?

एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा

"महाराज, आजकल माता-पिता नौकरी में व्यस्त रहते हैं। बच्चों को संभालने का वक्त नहीं मिलता। इसलिए वे उन्हें मोबाइल दे देते हैं ताकि वे चुप रहें। क्या यह सही है?"

इस पर महाराज ने बहुत सुंदर जवाब दिया।

उन्होंने कहा — बच्चे तो 35 साल पहले भी थे, तब भी लोग काम पर जाते थे, विदेश तक जाना पड़ता था।

तब भी न्यूक्लियर फैमिली (छोटे परिवार) थे, लेकिन तब बच्चों के हाथ में मोबाइल नहीं होते थे।

माता-पिता अपने काम पूरे करके रात को बच्चों के साथ समय बिताते थे। इसलिए आज भी छोटे बच्चों को मोबाइल नहीं देना चाहिए।”

"बच्चों को मोबाइल देना, संस्कार छीन लेना है"

प्रेमानंद महाराज का मानना है कि मोबाइल बच्चों के संस्कार बिगाड़ देता है।

उन्होंने कहा

आजकल बच्चे माता-पिता को ठीक से सम्मान नहीं देते।

वे उनके पैर छूकर प्रणाम तक नहीं करते।

इसका कारण है संस्कारों की कमी और मोबाइल का असर।”

महाराज ने माता-पिता को सलाह दी कि बच्चों को हर सुबह भगवान को प्रणाम करने,

माता-पिता के पैर छूने और आशीर्वाद लेने की आदत डालनी चाहिए।

उन्होंने कहा

आजकल बच्चे सुबह उठते ही फोन लेकर बैठ जाते हैं और रात तक उसमें खोए रहते हैं।

इससे उनमें मनुष्यता नहीं आती, बल्कि उनका मन और शरीर दोनों कमजोर हो जाते हैं।”

डेढ़-दो साल के बच्चों के हाथ में मोबाइल बिल्कुल नहीं देना चाहिए"

प्रेमानंद महाराज ने चेतावनी दी

डेढ़-दो साल के बच्चों को मोबाइल देना बहुत बड़ी गलती है।

यह एक खतरनाक आदत है जो बच्चों के शरीर और मन दोनों पर असर डालती है।”

उन्होंने कहा कि माता-पिता यह सोचते हैं कि मोबाइल देने से बच्चे दिनभर व्यस्त रहेंगे और रोएंगे नहीं,

लेकिन असल में यह आदत बच्चों में कई बीमारियों की जड़ बन जाती है

जैसे नींद की कमी, आंखों की कमजोरी, और मानसिक थकान।

प्रेमानंद महाराज का संदेश माता-पिता के लिए

महाराज का स्पष्ट संदेश है

बच्चों को संस्कार दें, मोबाइल नहीं।

वक्त की कमी हो तो भी कोशिश करें कि दिन में कुछ समय उनके साथ बिताएं।

बच्चों के जीवन में आपका प्यार, बातें और ध्यान मोबाइल से कहीं ज्यादा जरूरी है।”